الأدب 2

مجموعات  قصصية

  نزار ب.  الزين

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سيرة ذاتية
نزار ب. الزين


.

- تتجاوز قصصي القصيرة غير المطبوعة المائة قصة و أقصوصة
إضافة إلى  :

-  ثمانية أعمال روائية صغيرة ذات طابع وطني تحت مسمى كيمنسانيا

 ( الكيمياء الإنسانية )
-  ثمانية أعمال روائية صغيرة تحت عنوان كنز ممتاز بك
-  عمل روائي طويل واحد

 تحت عنوان عيلة الأستاذ

- عشر حكايات للأطفال
- عدد من الدراسات الأدبية و الفكرية نشرت في الصحف الكويتية (الراي العام - القبس - الوطن ) و العربية في أمريكا ( أنباء العرب - العرب ) و بعض المواقع الألكترونية المهتمة بالأدب .
أما عني شخصيا فأنا :
- نزار بهاء الدين الزين
- من مواليد دمشق في الخامس من تشرين الأول ( أكتوبر ) من عام 1931
- بدأت حياتي العملية كمدرس في دمشق لمدة خمس سنوات
- عملت في الكويت كأخصائي إجتماعي و مثقف عام ، لمدة 33 سنة قبل أن أتقاعد عام 1990، إضافة إلى عملي الإضافي في صحف الكويت .
- كتبت أول مجموعة قصصية بعنوان ( ضحية المجتمع ) عندما كنت في الثانوية العامة عام 1949
- كتبت مجموعتي الثانية ( ساره روزنسكي ) سنة 1979
- و إضافة إلى عشقي للأدب فإنني أهوى الفنون التشكيلية كذلك ، و قد أقمت معرضا لإنتاجي الفني في شهر أكتوبر 1999 في مدينة دمشق/ مركز المزة الثقافي خلال إحدى زياراتي للوطن ضمت 55 لوحة .
أعيش في الولايات المتحدة منذ إنتهاء خدمتي في الكويت أي منذ عام 1990 و أدير حاليا مع إبني وسيم مجلة ( العربي الحر ) الألكترونية - عبر الأنترنيت ؛
و عنوان الموقع : 
www.freearabi.com

 

 

مجموعة "بين عاشقين"

من المسؤول

؟

أقصوصة

 نزار ب  الزين*

 

" قام بترجمتها إلى اللغة البلغارية

الأديب خيري حمدان "

     بالتأكيد  يحملني المسؤولية ...

يدخل مقطب الجبين و يخرج  معفر الوجه بصفرة الكراهية ، عندما يواجهني  يشيح بوجهه عني ، و إن حاولت مخاطبته تجاهلني ، و إن ألحفت ، ينظر إليَّ شذرا ثم يلج إلى غرفته و قد تحرقت عيناه .

ألم تكفني عذاباتي بفقد فلذة كبدي ، ليزيدني بتعذيبه الصامت كل يوم ؟ ...

هو بالتأكيد يحملني المسؤولية ....

فهل أنا مسؤولة عن القدر ؟.. عن طفل كان يلعب كما يلعب كل الأطفال ، لينتهي لعبه بمأساة ؟

*****

بدأت القصة منذ حوالي شهر

كان كريم يلعب مع أصحابه فوق سطح العمارة ، كما كان يفعل كل يوم ، تستهويه و صحبه لعبة ( الغميضة ) ، يطلب لأحدهم أن يغمض عينيه ، و ينتشر الآخرون باحثين عن مخبأ ، و على مغمض العينين أن يعثر عليهم بعد أن يعد ببطء إلى العشرة ..

يلعبونها كل يوم ، يكررونها كل يوم ، بلا ملل  أو سأم ....

و لكن ....

 في ذلك اليوم المشؤوم ، اختبأ كريم خلف خزان الماء ، سمع صوت ارتطام متكرر بجدران الخزان من الداخل ، دفعه فضوله ليعرف السبب ، نادى أحد أصدقائه ، عاونه على تسلق الخزان ، أطل من فوهته العليا ، ثمت حمامة كانت تناضل للخروج من الماء ،

مد كريم يده لينقذها ،

كان ماء الخزان مليئا حتى ثلثيه ..

مدها أكثر ..

اقترب من إمساك الحمامة ..

و لكنه ...

احتاج إلى يده الأخرى ..

فاختل توازنه....

ثم ..

سقط في قلب الخزان ..

خاف أصدقاؤه .. لا أحد يعرف مِمَّ خافوا ؟!.. لعلهم خشوا أن يتهمهم أحد بدفعه ؟!!

فمن يدري ما يجول في عقول الأطفال ؟

و لكن .. بعد ساعة أو تزيد ، لاحظت والدة أحدهم أن ابنها مضطرب غاية الإضطراب ، استنطقته ، فهالها ما سمعته ..

ثم ....

هرعت إلى أم كريم تخبرها ،

ثم ...

صعدتا كلاهما ....

لتكتشفا أن الأوان قد فات ...

*****

بعد حوالي شهر

قرع الباب ، كان الطارق محضر المحكمة الشرعية ......

 

-------------

* نزار بهاء الدين الزين

   سوري مغترب

   عضو إتحاد كتاب الأنترنيت العرب

   عضو الجمعية الدولية للمترجمين و اللغويين العرب ArabWata

الموقع :  www.FreeArabi.com

البريد  :  nizar_zain@yahoo.com

 

 

Кой е отговорен?

 

Той винаги ме кара да се чувствам виновна. Влиза намръщен, лицето му е пожълтяло от омраза. Като ме види, се обръща настрани, ако се опитам да му проговоря, ме избягва. Ако настоявам, той единствено хвърля огнени погледи и влиза мълчаливо в своята стая.

Не ми ли стига болката от загубата на чедото ни, а сега и той ме мъчи със своето мълчание? Със сигурност ме намира за виновна за смъртта на моето дете. Аз ли съм виновна пред тази съдба? То бе просто едно дете, което играе с другите деца, когато настъпи неизбежното и играта завърши с голямо нещастие.

 

* * *

 

Тази история започна преди около един месец.

Карим играеше на покрива на една сграда, както правеше всеки ден. Хареса му да играе на жумичка. Децата искат някой от тях да си затвори очите, за да се скрият някъде. След като момчето с вързани очи брои до десет, той трябва да започне да ги търси. Тази игра се играе всеки ден, не им омрърза, и не чустват скука.

Но.....

През онзи зловещ ден, Карим се скри зад контейер пълен с вода. Докато стоеше мирно, чу няколко удара във вътрешната страна на контейнера. Любопиството го накара да разбере причината за това. Той повика едно приятелче, за да му помогне да се изкачи отгоре. Погледна през малкия отвор на контейнера и там видя един гълъб, който се мъчи да се измъкне от водата.

Карим протегна ръката си, за да го спаси.

Две трети от контейнера бяха пълни с вода.

Той още малко протегна ръката си...

За малко да хване гълъба...

Но...

Той се нуждаеше и от другата си ръка...

Тогава изгуби равновесие..

След това...

Той падна в контейнера.

Неговите приятели се уплашиха, без да знаят, защо се страхуват. Може би се страхуваха да не бъдат обвинени в това, че са го бутнали във водата?!.

Кой ли знае? Какво ли си мислят децата?

Но, след час една майка видя сина си много разтревожен, разпита го, и се ужаси като разбра за случилото се...

След това...

Побегна при майката на Карим за да й каже...

След това...

Двете се качиха на покрива, но

Разбраха, че е прекалена е късно...

 

* * *

 

След около един месец

На вратата се чука, там стои представител на съответния съд...

 

Низар.Б.Алзейн,

Сирийец, живеещ в Америка,

Член на съюза на арабските интернет писатели,

Член на международната арабска организация

за лингвисти и преводачи Arabwata.

Притежава електронното списание „free arabi”.